कम न होने दें कैल्शियम


भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक 23 प्रतिशत भारतीय स्त्रियों के खानपान में कैल्शियम की कमी पाई गई। इतना ही नहीं 42 प्रतिशत टीनएजर लडकियों के रोजाना के भोजन में कैल्शियम युक्त चीजों का अभाव था। इसी सर्वेक्षण के अनुसार एनीमिया के बाद कैल्शियम की कमी भारतीय स्त्रियों की सबसे बडी स्वास्थ्य समस्या है। इसकी वजह से उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस और आथ्र्राइटिस जैसी स्वास्थ्य समस्याएं परेशान करने लगती हैं।


क्यों होता है ऐसा

शिशु को जन्म देने और उसे फीड कराने की वजह से स्त्रियों को कैल्शियम की ज्यादा जरूरत होती है। इसके अलावा पीरियड्स के दौरान प्रतिमाह स्त्री के शरीर से कुछ मात्रा में कैल्शियम बाहर निकल जाता है, लेकिन सबसे बडी विडंबना यह है कि जहां

स्त्रियों को ज्यादा कैल्शियम की जरूरत होती है वहीं रोजाना के भोजन से उन्हें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम नहीं मिल पाता। इसके लिए सामाजिक और आर्थिक कारण सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। गरीबी तो कुपोषण की एक बडी वजह है ही। इसके अलावा हमारा सामाजिक ढांचा ऐसा है कि स्त्री चाहे कितनी ही शिक्षित और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर क्यों न हो, लेकिन आज भी वह सदियों पुरानी रूढिवादी मन:स्थिति से बाहर नहीं निकल पाई है। वह परिवार के सभी सदस्यों के खानपान और सेहत का तो ख्ायाल रखती है, पर अपने ऊपर ध्यान नहीं दे पाती। भारतीय परिवारों में मिल्क प्रोडक्ट्स को आज भी ख्ास दर्जा दिया जाता है। इसलिए पुरुषों और बच्चों को खिलाने के बाद अगर ये चीजें बचती हैं तभी स्त्रियां इनका सेवन कर पाती हैं। गांव और छोटे शहरों की स्त्रियां जहां जागरूकता की कमी की वजह से अपने रोजाना के भोजन में पौष्टिक चीजें शामिल नहीं कर पातीं, वहीं महानगरों में रहने वाली कामकाजी स्त्रियां अति व्यस्त जीवनशैली की वजह से अपने खानपान पर ध्यान नहीं दे पातीं। लडकियों के खानपान पर बचपन से विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, ताकि भविष्य में वे स्वस्थ और सक्रिय रह सकें, पर आजकल ज्यादातर टीनएजर लडकियां छरहरी काया की चाहत में दूध और उससे बनी चीजों का सेवन नहीं करतीं। इस वजह से उनके शरीर में स्थायी रूप से कैल्शियम की कमी हो जाती है और भविष्य में उसकी भरपाई बहुत मुश्किल होती है। इतना ही नहीं एस्थमा के लिए दी जाने वाली स्टीरॉयड दवाओं के साइड इफेक्ट की वजह से भी शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है। कई बार आनुवंशिक कारणों से भी स्त्रियों के शरीर में कैल्शियम की कमी होती है। अगर इस समस्या की फेमिली हिस्ट्री रही हो तो स्त्रियों को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

क्यों •ारूरी है कैल्शियम

किसी भी दूसरे विटमिन या मिनरल की तुलना में हमारे शरीर को कैल्शियम की जरूरत अधिक मात्रा में होती है। हमारी हड्डियां, दांत और नाख्ाून 99 प्रतिशत कैल्शियम से ही बने होते हैं। शेष 1 प्रतिशत कैल्शियम भी हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी होता है। यह रक्त में पाया जाता है और प्रत्येक कोशिका के बीच एक्स्ट्रा सेल्यूलर फ्लूइड में भी मौजूद होता है। दिल की धडकन, हॉर्मोनल सिस्टम, मांसपेशियों के संचालन, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और ख्ाून के थक्के जमाने के लिए भी शरीर को कैल्शियम की जरूरत होती है। नर्वस सिस्टम को सही ढंग से चलाने और एंजाइम्स को सक्रिय बनाने में भी कैल्शियम अहम भूमिका निभाता है।

अनूठा है बॉडी का सिस्टम

जन्म से लेकर 35 वर्ष की आयु तक हम जितना भी कैल्शियम ग्रहण करते हैं, वह शरीर में एकत्र होकर हमारे लिए बोन बैंक का काम करता है और यही बोन बैंक हमारे शरीर के लिए ताउम्र कैल्शियम की आपूर्ति करता है। लगभग 35 उम्र के बाद चाहे हम कितनी ही अधिक मात्रा में कैल्शियम का सेवन क्यों न करें, पर इसके बाद शरीर में कैल्शियम का स्तर बढा पाना मुश्किल हो जाता है। तभी तो कहा जाता है कि बचपन का खाया-पीया ही बुढापे में काम आता है। हमारे शरीर का अपना मेकैनिज्म कुछ ऐसा है कि अगर हम भोजन के जरिये समुचित मात्रा में कैल्शियम नहीं लेते तो यह ख्ाुद अपने लिए कैल्शियम बना लेता है। दरअसल हमारे थॉयरायड ग्लैंड के ठीक नीचे मटर के दाने जैसे आकार का एक छोटा सा ग्लैंड होता है, जिसे पैराथॉयरायड ग्लैंड कहा जाता है, जब हमारे रक्त में कैल्शियम की मात्रा कम होती है तो यह हड्डियों से कैल्शियम निकाल कर रक्त के लिए उसकी जरूरत पूरी कर देता है, पर इससे हमारे शरीर में पोटैशियम और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड जाता है। इससे हार्ट पर भी बुरा असर पडता है। इसके अलावा जब हमारे रक्त और कोशिकाओं को कैल्शियम की ख्ाुराक नहीं मिल पाती तो इसे पूरी करने के लिए हड्डियों से कैल्शियम का रिसाव शुरू हो जाता है। इसी वजह से ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या होती है।

कैसे पहचानें कमी के लक्षण

आमतौर पर स्त्रियां अपने शरीर में कैल्शियम की कमी को पहचान नहीं पातीं। अगर आप सचेत ढंग से इसके लक्षणों को पहचानें तो यह समस्या आसानी से हल हो सकती है : 


-रात को पैरों की मांसपेशियों में दर्द


- रूखी त्वचा, नाख्ाूनों में दरार और दांतों में पीलापन


- पीएमएस के लक्षणों (पीरियड की शुरुआत से पहले दर्द और चक्कर आना) में अचानकबदलाव


- मामूली सी चोट पर फ्रैक्चर होना

कैसे मिले कैल्शियम

दूध और इससे बनी चीजें कैल्शियम का सबसे अच्छा स्रोत मानी जाती हैं। इसके अलावा सभी हरी पत्तेदार सब्जियों, दालों , सोयाबीन, ओट्स, कॉर्न फ्लेक्स जैसे सीरियल्स ब्राउन राइस, चोकर युक्त आटा और रागी (मडुआ) में भी पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। अंडा, मछली और सी फूड से भी शरीर को अच्छी मात्रा में कैल्शियम मिल जाता है, पर कैल्शियम का सबसे ज्यादा फायदा हमें दूध से मिलता है क्योंकि इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जिससे हमारी आंतों में कैल्शियम अच्छी तरह जज्ब हो जाता है। अगर किसी को मिल्क प्रोडक्ट्स से एलर्जी हो तो उसे सोया मिल्क, टोफू और सोयाबीन का सेवन करना चाहिए।

ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे


जब बात कैल्शियम की चल रही हो तो हम उसके जिगरी दोस्त विटमिन डी को कैसे भूल सकते हैं भला? यह उसका ऐसा प्यारा और सच्चा दोस्त है कि कैल्शियम हमेशा उसके साथ रहना चाहता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि हमारे शरीर को भी इनकी यह दोस्ती इतनी पसंद है कि वह अकेले कैल्शियम को रिजेक्ट कर देता है। जब विटमिन डी का साथ हो तभी हमारे शरीर को कैल्शियम का फायदा मिल पाता है। विटमिन डी हमारी हड्डियों में कैल्शियम के अवशोषण की क्षमता बढता है। सूरज की रौशनी को विटमिन डी का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। इसलिए रोजाना सुबह की धूप में कम से कम पंद्रह-बीस मिनट बिताने की कोशिश करनी चाहिए। अगर व्यस्तता की वजह से ऐसा संभव न हो तो जब भी आप कैल्शियम सप्लीमेंट लें तो उसके साथ विटमिन डी का भी सेवन जरूर करें। वैसे, सभी मिल्क प्रोडक्ट्स, मछली, अंडा, चिकन, मटन, मशरूम, सोयाबीन और मेवों में पर्याप्त मात्रा में विटमिन डी पाया जाता है।


•ारूरत •िांदगी भर की


अगर बचपन से ही लडकियों के खानपान पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाए तो आगे चलकर उनकी हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होंगी। युवावस्था में पारिवारिक जीवन की शुरुआत से पहले भी उन्हें अपने खानपान में कैल्शियम युक्त चीजें शामिल करनी चाहिए। इसके अलावा प्रेग्नेंसी के दौरान और उसके बाद भी स्त्रियों को अपने भोजन में ज्यादा से ज्यादा कैल्शियम युक्त चीजें शामिल करनी चाहिए, ताकि गर्भ में शिशु का सही ढंग से विकास हो। शिशु को फीड देने वाली स्त्रियों के शरीर से प्रतिदिन लगभग 280 मिग्रा. कैल्शियम बाहर निकल जाता है। इस वजह से कई बार उन्हें कमजोरी महसूस होने लगती है। इससे बचने के लिए स्त्रियों को भरपूर मात्रा में कैल्शियम युक्त चीजों का सेवन करना चाहिए। मेनोपॉज का दौर भी स्त्रियों के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। जब तक उन्हें मनोपॉज नहीं होता तब तक उनकी हड्डियों को ऐस्ट्रोजेन हॉर्मोन का संरक्षण मिल रहा होता है, जो उन्हें जोडों और हड्डियों के दर्द जैसी समस्याओं से बचाता है, लेकिन पीरियड खत्म होते ही उनके शरीर में इस हार्मोन की मात्रा कम हो जाती है। इसी वजह से मेनोपाज के बाद स्त्रियों की हड्डियों पर से एस्ट्रोजेन का सुरक्षा कवच हट जाता है। इस वजह से उसकी हड्डियों से कैल्शियम बाहर निकलना शुरू हो जाता है। इस समस्या से बचने के लिए मनोपज की उम्र में पहुंचने के बाद स्त्रियों को बोनडेंसिटी टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इससे उनके शरीर में कैशिल्यम के स्तर का अंदाजा हो जाता है। अगर रिपोर्ट ठीक हो तो भी इस उम्र में खानपान और एक्सरसाइज पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। क्योंकि शारीरिक गतिविधियां कम होने की वजह से भी हड्डियों में कैल्शियम के अवशोषण की क्षमता कम हो जाती है। हमेशा तनावमुक्त रहने की कोशिश करें क्योंकि तनाव की वजह से शरीर में मौजूद कैल्शियम यूरिन के जरिये तेजी से बाहर निकलने लगता है।

नुकसानदेह है ओवरडो•ा

कैल्शियम हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन इसका ओवरडोज हमारी सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। अगर शरीर में इसकी मात्रा बढ जाए तो हड्डियां ज्यादा सख्त होकर अकड जाती हैं और इससे भी हाथ-पैरों में दर्द होने लगता है। इसके अलावा जब शरीर को जरूरत से ज्यादा कैल्शियम मिलता है तो वह किडनी में जाकर वहां स्टोन के रूप में जमा होने लगता है। हालांकि, ऐसा होने की आशंका बहुत कम होती है क्योंकि हमारे शरीर का अपना मेकैनिज्म इतना दुरुस्त है कि अगर हम ज्यादा कैल्शियम ग्रहण करते हैं तो शरीर उसका जरूरत भर ही इस्तेमाल करता है। अतिरिक्त कैल्शियम यूरिन के साथ बाहर निकल जाता है। फिर भी इसके साइड इफेक्ट से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं, कैल्शियम की जरूरत खानपान से ही पूरी करने की कोशिश करें, डॉक्टर की सलाह के बिना कैल्शियम सप्लीमेंट का सेवन न करें। बुजुर्गो के लिए कैल्शियम को पचा पाना मुश्किल होता है। इसके सेवन से उन्हें कब्ज और गैस की समस्या होती है। ऐसे में डॉक्टर को अपनी परेशानी जरूर बताएं ताकि कैल्शियम सप्लीमेंट के साथ आपको दूसरी जरूरी दवा भी दी जा सके।

किसे चाहिए कितना कैल्शियम

रिकमेंडेड डायटरी इनटेक (आरडीआई) अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा संचालित संस्थान है और इसके सुझावों पर दुनिया के ज्यादातर देश अमल करते हैं। आइए जानते हैं कि हमें किस उम्र में प्रतिदिन कितने कैल्शियम की जरूरत होती है और अगले पृष्ठ पर देखें कि किन चीजों में कितना कैल्शियम पाया जाता है :


उम्र- पुरुष- स्त्री


0-6 माह- 200 मिग्रा.-200 मिग्रा.


1-3 वर्ष- 260 मिग्रा.- 260 मिग्रा.


4-8 वर्ष- 700 मिग्रा.- 700 मिग्रा.


9-13 वर्ष- 1,300 मिग्रा.-1,300 मिग्रा.


14-18 वर्ष- 1,300 मिग्रा.-1,300 मिग्रा.


19-50 वर्ष- 1,000 मिग्रा.-1,000 मिग्रा.


51-70 वर्ष -1,000 मिग्रा.-1,200 मिग्रा.


71 + वर्ष- 1,200 मिग्रा.-1,200 मिग्रा.


(दिल्ली स्थित रॉकलैंड हॉस्पिटल की सीनियर डाइटीशियन डॉ. सुनीता रॉय चौधरी से बातचीत पर आधारित)


Source - Jagaran

हर सुबह एक आंवला खाने के ये हैं 7 फायदे!

आंवला विटामिन का एक बहुत अच्छा स्त्रोत है। इसीलिए हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस फल को पूज्यनीय माना गया है। इसकी छांव में बैठकर खाने से भी अनेक रोग दूर होते हैं।कहते हैं एक आंवले में ३ संतरों के बराबर विटामिन की मात्रा होती है। आंवले में सभी रोगों को दूर करने की शक्ति है। आंवला युवाओं को यौवन शक्ति देता है व बुढ़ों को युवा बनाए रखता है बस शर्त है इसका किसी न किसी रूप में रोजाना सेवन किया जाए। आंवला त्रिफला की ३ औषधियों में से एक है। इसे सूखे चूर्ण के रूप में अन्य औषधियों के साथ नुस्खे के रूप में और अचार, चटनी, मुरब्बे के रूप में सेवन किया जाता है।





1. रोजाना एक आंवला खाने से पेट साफ रहता है कब्ज नहीं होती है व एसीडिटी जड़ से खत्म हो जाती  है।

2. आंवला का सेवन करने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। किडनी से संबंधित समस्याएं नहीं होती है।
3. आवंले का जूस भी पिया जा सकता है। आंवला का जूस पीने से खून साफ होता है। रोज एक आंवला खाने से लीवर से जुड़ी बीमारियां भी नहीं होती हैं।
4. आंवला शरीर की त्वचा और बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसे खाने से त्वचा लंबी उम्र तक जवां बनी रहती है बाल भी सफेद नहीं होते हैं।
5. रोजाना आंवले का मुरब्बा खाकर दूध पीने से शरीर स्वस्थ रहता है।
6. सुबह नाश्ते में आंवले का मुरब्बा खाने आपका शरीर स्वस्थ बना रहता है।आंवला खाने से आंखों की रोशनी बढती है।
7. हर सुबह एक आंवला खाने से पथरी नहीं होती है।
Source - Bhasker

Home remedies for diabetes



There is an alarming rise in the prevalence of diabetes in India. Thanks to our eating habits and sedentary lifestyle, even gestational diabetes is not uncommon.

The sad fact is that it could affect the baby too. According to recent statistics, India has more people with Type 2 diabetes than any other nation. Who likes to take medicines everyday? Insulin and dialysis is even worse experience. And mind you, as opposed to the misconception, eating sweets is not the only cause for this disease. Stress and genes too play a major role in this. Although one cannot do much about it if it's genetic, it definitely doesn't harm to prevent it.


No, you don't have to pop pills everyday. Just a few changes in your foot habits and you can cut the risks to a great extent. Here are some things that you can do at home to prevent diabetes or reduce it if you already are affected by it.

Nobody likes bitter things. But isn't it better to take a fruit or a vegetable instead of medicines? Having bitter gourd juice on an empty stomach has proved to prevent diabetes. If you are too stubborn or enjoy eating bitter gourd, then you could make stuffed karela (bitter bourd) or fry them like chips and have them as a snack. This will not just bring a change in your menu and give a respite to your taste buds, but also be beneficial to your health.

Soak a few seeds (1/4 tsps) of methi in water overnight. First thing after you brush your teeth in the morning, gulp down the methi along with the water.

Jambul fruit is considered as an effective medicine for diabetes considering its effect on pancreas. The seeds too can be dried, powdered and had with water twice a day.

The guava is among those fruits that are available in most times of the year. With its vitamin C property and high fibre content, this is perhaps one fruit that diabetics can fearlessly have. However, a recent study has shown that having guava with its skin can heighten the blood sugar levels, so make sure you peel off the skin before consumption.

Gooseberry/amla juice too cuts the blood sugar levels.

If you can't do without sugar in your coffee or tea, try and substitute honey.

Studies have shown that black coffee without sugar cuts the risk of Type 2 diabetes

Among other benefits, green tea is also helpful in reducing the blood sugar and insulin levels in the body

Talk to the eldest member in your family and am sure they will come up with a number of home remedies to prevent diabetes. Besides, make regular walk and exercise part of your routine.
Source - times of india

Health benefits of exercise for women


Health benefits of exercise for women

Washington: While physical activity is necessary for both men and women, there are gender-specific benefits that women need to be active, researchers say.

Scientists at the University of Alabama at Birmingham have reported a list of benefits that should help push people, especially women, out the door and into the gym.

Men are more likely than women to meet the federal guidelines for adults of at least 2.5 hours of physical activity per week, according to the Centers for Disease Control and Prevention.

Inactive adults have a higher risk for early death, heart disease, stroke, type 2 diabetes, depression and some cancers. For women, increasing research is showing exercise may help reduce breast cancer risk, says Marcas Bamman, PhD, director of the UAB Center for Exercise Medicine.



“Exercise as a means of preventing or reducing the risk of various cancers, particularly breast cancer, is important for two reasons: both the direct physical effects and the indirect effect, which is preventing or contributing to mechanisms that help prevent weight gain,” Bamman says. He adds that when people gain weight, their cancer risk rises, too.

A reduction in breast cancer risk is not the only benefit associated with getting active, especially for post-menopausal women.

“The body shape of post-menopausal women is more likely to change due to the removal of hormone-specific profiles like estrogen,” Bamman explains. “Unless they exercise regularly and watch what they eat, they will have a tendency to gain more abdominal fat, which is the most dangerous, and their body composition will become more apple-shaped — like a man’s — instead of pear-shaped.”

Bamman’s suggestion for most post-menopausal women: a mix of endurance and resistance training, three to four days per week.

Another factor women need to consider is loss of bone mass, which can lead to osteoporosis, says Retta Evans, PhD, UAB associate professor of health education. But — you guessed it — exercise helps here as well.

“Starting at around 30 years of age, women begin to lose bone mass,” Evans says.

“Unless you are doing something to oppose that, such as weight-bearing exercise, it will continue. Resistance and weight training are the best, but things like walking or jogging in combination with weights are good enough.” Dance, Zumba and kickboxing also help with maintaining bone mass, Evans says. But activities like swimming, because they do not involve weight-bearing, don’t qualify.

Exercise can also help with another cause of concern for many women: their posture. But it’s not just any type of exercise, Evans says — it’s yoga.

“Yoga helps to maintain your muscularity and that helps with maintaining your posture,” she explains. “It also helps in stretching all of the muscle groups, front and back. Yoga is another great weight-bearing activity as well,” she added.
Source - zeenews

BMC has decided to launch an online directory to keep a tab on diabetes patients registered


In what could be considered a unique service, the BMC has decided to launch an online directory to keep a tab on diabetes patients registered with its dispensaries.
Additional municipal commissioner Manisha Patankar-Mhaiskar said the directory is expected to be launched by the beginning of next year. "We will create a database of patients visiting municipal dispensaries. We will have details of the person’s health status from the day he/she registers and we will keep a watch on them," said Mhaiskar.
The civic body also plans to increase the number of dispensaries from 28 in 2011 to 55 this year. They will carry out door-to-door surveys to trace diabetic patients in slum / chawl areas. The survey is expected to be completed by December 31. Awareness campaigns will also be held at work places and community health care centres. There are also plans to hold Sunday camps and screen films to spread awareness.

Vitamin D deficiency not uncommon in India

The role of Vitamin D in the growth of bones and formation of teeth is well known. Severe deficiency of this vitamin leads to brittle bones, a disease known as rickets in children and osteomalacia in adults. However, there’s more to the ‘sunshine vitamin’ than bone health.

In addition to its role in maintaining calcium and phosphorus balance, Vitamin D maintains maximum muscle strength, inhibits inflammatory activity and prevents many diseases related to the immune system, including Type I diabetes, multiple sclerosis, systemic lupus erythematosus (SLE), rheumatoid arthritis and many common cancers. Low levels of Vitamin D have also been linked to hypertension, cardiovascular disease, Type II diabetes mellitus, infectious diseases, tuberculosis, asthma, psoriasis and even depression.

Vitamin D deficiency is found even in countries like India, where sunlight is abundant. Though this vitamin is naturally present in very few foods, it is added to foods through fortification in developed countries. Due to this, deficiencies are uncommon. Rich food sources include fish, oils, ghee, butter and egg yolk. Compared to fish-liver oil, which is the best dietary source of Vitamin D, other foods are quite low in this vitamin. Ideally, a diet that includes dairy products, fish and egg yolk, coupled with adequate exposure to sunshine, should prevent Vitamin D deficiency.

Now, a device that diagnoses cancer in just 20 minutes

The world’s first device that can diagnose cancer in just 20 minutes and identify the correct drug required is being developed by British scientists.

The ‘tumour profiler’ device will allow doctors, nurses and even pharmacists to quickly identify all known types of cancer.

Researchers hope the device will be used in the UK within the next three years, the Daily Mail reported.

The device has been invented as part of a partnership between private firm QuantuMDx, Newcastle University and Sheffield University.

Scientists claim the Q-Cancer device will have a dramatic impact on the rapid and accurate diagnosis of cancer.

It has the potential to prolong the lives of the 12 million newly diagnosed cancer sufferers around the world, the manufacturer claims.

It will enable surgeons to immediately remove most of the tumours and allow them to prescribe the correct treatment regime according to the type of cancer developed.

The device makes use of advanced nanotechnology, analysing sub microscopic amounts of tissue to work out the type of cancer, its genetic make-up and how far it has developed.

“We have a world leading position to deliver complex DNA tumour testing to the routine pathology lab or even to the operating theatre,” said researcher John Burn from the Newcastle University.

“A low-cost device requiring no technical expertise will extract, amplify and analyse tumour DNA to make sure the patient gets the right treatment first time and without delay,” he said.

“Currently tumour samples are sent away to a centralised sequencing laboratory, which can take several weeks to turnaround results, usually at a very high price which is not routinely affordable to many economies,” Chief executive Elaine Warburton said.

“As far as we are aware, QuantuMDx’s current underlying technologies, which can break up a sample and extract the DNA in less than five minutes represents a world first for complex molecular diagnostics.” Warburton said.
Source - THE HINDU

Allocation for health sector enhanced: Manmohan

Prime Minister Manmohan Singh with Union Minister of Health and Family Welfare, Ghulam Nabi Azad during the foundation stone laying ceremony of Redevelopment of Lady Hardinge Medical College in New Delhi on Saturday.
Recognising the need to address complex challenges in the health sector, Prime Minister Manmohan Singh on Saturday said allocation for it has been enhanced by about three times in the 12th Plan Period with enhanced thrust on nutrition and sanitation. He also noted that free generic drugs will be made available through all public hospitals in the country to help in “reducing out of pocket expenditure of the poor” on health.
“The allocation for health sector has been enhanced some three times in the 12th Five Year Plan as compared with the 11th Plan allocation,” he said speaking at the foundation stone laying function of the redevelopment project of Lady Hardinge Medical College in New Delhi.

Besides, as factors such as nutrition, safe drinking water, sanitation, housing and education, particularly education of girl child, are increasingly being underlined as the social determinants of health, he said the government is laying great emphasis on their importance by providing adequate thrust to these sectors in the Plan Period.

The Prime Minister also said a major urban health initiative will be launched during the Plan Period to focus on specific health issues of urban poor and called for better synergy and coordination between different ministries for best results.

Top 10 tips for skin care this winter


The air is laden with the smell of winters. Winters are finally here with their chill. The image of cosying up in bed with a hot cup of coffee is what this season brings. But don’t get lost in your lazy thoughts because the very blissful winters can play havoc on your skin and be quite brutal. In winter, low temperatures, low humidity and strong, harsh winds deplete skin of its natural lipid layer, which keeps the skin from drying out. Enjoy winters but be very careful about your skin as the dry rough winds can take away your rosy glow and leave your skin tattered. Worried? Don’t be! Try these simple skin care tips:
Moisturize, moisturize, moisturize

As the weather changes, your skin care routine also should. Pick up a moisturizer that is oil-based, rather than water-based oil. The oil will create a protective layer on the skin that retains more moisture than any cream or lotion can. So always stay moisturised and make this your winter mantra.

Stay hydrated 

Winter air lacks moisture which causes the skin to become dry and sensitive. To prevent further dryness it’s preferable to drink one or two litres everyday. Also consume fruits and vegetables like apples, celery and cucumbers which have enough water content in them. These food items curb your hunger and boost the water intake to keep you healthy and hydrated all the day along.

Put on your sunscreen

Get it out of your head that sunscreen is only meant for summers. Going out without wearing sunscreen can lead to redness, burning, breakouts and other damage. Winter sun can still damage your skin. So, try applying a broad-spectrum sunscreen to your face before you step out in the open.Keep a sunscreen handy and apply it again if you intend to stay out for a long time.

Switch to fish oil pills

Omega-3 fish oil pills may soothe super dry skin, studies suggest. Patients who took fish oils pills witnessed significant results within a few week with their skin, hair and nails improving markedly.

Humidifier is a must

To restore environmental humidity inside your home during the dry in the winter months, use a humidifier. Humidifier can prevent inflammation and irritation of the mucus membranes, prevent and treat dry skin and congestion.

Avoid very hot water 

Though it feels awesome, but one should never shower or wash their face with hot water. It breaks the capillaries in the face and also the lipid barriers in the skin which leads to a loss of moisture. According to experts, adding a few drops of Jojoba or almond oil to a bath can nourish and hydrate dry skin.

Don’t lick your chapped lips

Instead of licking your dry and chapped lips which cause further dryness, keep enough of lip balms and lotions with you. To try a home remedy, you can also apply few drops of olive oil mixed with few drops of honey to your lips for few minutes to keep it hydrated.

Love thy hands
The skin of our hands is thinner than other parts of the body. So they need extra care in winters as they are prone to irritation and dryness. Apply a nice cream and well moisturise them before going to bed. Whenever you go out, slip your hands in those thick gloves, it will protect your hands as well as your nails from sudden breakages.

Notice that cracked heel


Cracked heels can seriously be a pain in winters. To provide some comfort to those ailing heels repair them by soaking in warm water. Apply some moisturising lotion or a foot massage cream and rub it gently over. Always put on loose socks and slippers even when you strut around the house. Pamper your feet well and go for regular pedicures as it will keep your feet soft, hydrated and crack-free.

Maintain a healthy lifestyle

A well-rounded approach towards your life and body also plays a significant role in determining your skin type. Skin sensitivities can be triggered by lifestyle factors such as diet and stress. The overall health, both mind and body is reflected by our skin. So, enjoy a healthy diet along with innovative fitness activities to alleviate tension ensuring the mind, body and skin to be in great shape.

So, enjoy winters and stay glowing and beautiful.
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