अनुलोम विलोम प्राणायाम: सही तरीका, संभावित फायदे, समय और सावधानियां
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, बेचैनी, मानसिक थकान और अनियमित जीवनशैली जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में योग और प्राणायाम जैसी सरल practices शरीर और मन को स्वस्थ रखने वाली दिनचर्या का हिस्सा बन सकती हैं।
इन्हीं लोकप्रिय श्वसन अभ्यासों में अनुलोम विलोम प्राणायाम का विशेष स्थान है। इसे कई संदर्भों में नाड़ी शोधन या Alternate Nostril Breathing से भी जोड़ा जाता है। इसमें बारी-बारी से एक नथुने से श्वास लेना और दूसरे नथुने से छोड़ना शामिल होता है।
आधुनिक शोध में प्राणायाम और योग से तनाव, मानसिक wellbeing तथा कुछ physiological parameters पर संभावित सकारात्मक प्रभावों के संकेत मिले हैं। हालांकि, किसी भी प्राणायाम को किसी बीमारी का इलाज या prescribed medical treatment का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। WHO भी योग को physical activity, breathing regulation और mindfulness से जुड़ी ऐसी practice के रूप में देखता है जो wellbeing और stress management में सहायता कर सकती है।
आइए जानते हैं अनुलोम विलोम क्या है, इसे सामान्य रूप से कैसे किया जाता है, इसके संभावित लाभ क्या हैं और किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए।







