रात के समय महसूस होता है ऐसा, तो हो सकता है कैंसर खतरा

रात के समय महसूस होता है ऐसा, तो हो सकता है कैंसर खतरा

कैंसर एक ऐसी जानलेवा बीमारी है, जिसका नाम सुनकर ही लोग सहम जाते हैं. अनहेल्दी लाइफस्टाइल के चलते दुनियाभर के लोग तेजी से इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. शुरुआत में अगर इस बीमारी का इलाज न किया जाए तो व्यक्ति की जान को भी खतरा हो सकता है.
नेशनल हेल्थ सर्विस की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 लोगों में कम से कम एक व्यक्ति को उनके जीवन में एक बार कैंसर होने का खतरा बना रहता है. रिपोर्ट के मुताबिक, U.K में ब्रेस्ट कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और पेट का कैंसर सबसे आम हैं.

कैंसर 200 से अधिक प्रकार के होते हैं, जिनके लक्षण भी एक दूसरे से काफी अलग होते हैं. हालांकि, कई बार कैंसर के लक्षण शुरुआती समय में सामने नहीं आते हैं. लेकिन कई लक्षण ऐसे होते हैं, जिनकी जानकारी न होने की वजह से लोग उसे पहचान नहीं पाते हैं.
U.K की कैंसर रिसर्च के मुताबिक, रात के समय अगर बहुत ज्यादा पसीना आता है तो ये कैंसर का लक्षण हो सकता है. हालांकि, कम ही लोगों में ये लक्षण दिखाई देता है.

कैंसर रिसर्च के मुताबिक, इंफेक्शन या किसी दवाई के साइड इफेक्ट की वजह से भी अक्सर रात के समय अधिक पसीना आ सकता है. महिलाओं में कई बार मेनोपॉज के बाद पसीना आने की समस्या बढ़ जाती है.
लेकिन अगर अक्सर ही आपको रात के समय बहुत ज्यादा पसीना आता है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये कैंसर का एक संकेत हो सकता है.

कैंसर रिसर्च ने सलाह देते हुए कहा कि जिन लोगों को ये समस्या है वो अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें.
कैंसर चैरिटी के मुताबिक, रात में अधिक पसीना आने का संबंध नॉन-होजकिंग और होजकिंग लिम्फोमा, कार्सिनॉयड, ल्यूकेमिया, मेसोथेलियोमा, हड्डियों का कैंसर और लिवर कैंसर से होता है.
बता दें, नॉन-होजकिन और होजकिंग लिम्फोमा कैंसर व्यक्ति के लिम्फेटिक सिस्टम में बनता है. गर्दन, बांह में सूजन भी इन दो कैंसर के लक्षण हो सकते हैं.
कार्सिनॉयड कैंसर धीरे-धीरे शरीर के किसी भी हिस्से में फैल जाता है. शरीर के जिस हिस्से में ये कैंसर होता है, इसके लक्षण भी उसी पर निर्भर करते हैं.

ल्यूकेमिया कैंसर- इस कैंसर में सफेद रक्त कोशिकाएं प्रभावित होती हैं. इस कैंसर में स्किन पीली पड़ जाती है. थकान महसूस होती है. सांस लेने में परेशानी होती है. समय-समय पर बुखार आने लगता है. वजन घटने लगता है. हड्डियों और जोड़ों में दर्द होता है.

आपको अगर अपनी सेहत और शरीर में कोई भी बदलाव दिखाई देते हैं तो अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें.
Source - Aaj Tak

बच्चे को कैंसर से बचा सकती है ब्रोकोली, जानें कब खाएं

बच्चे को कैंसर से बचा सकती है ब्रोकोली, जानें कब खाएं

गर्भावस्था में ब्रोकोली खाना खासा फायदेमंद साबित हो सकता है. इसके गर्भस्थ शिशु के कैंसर का शिकार होने की आशंका घट जाती है. बर्मिंघम की अलबामा यूनिवर्सिटी के अपने एक स्टडी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है.

दरअसल, ब्रोकोली में glucoraphenin तत्व अधिक मात्रा में पाया जाता है. यह कैंसर कोशिकाओं से लड़ने की अद्भुत क्षमता रखता है. ब्रोकली में sulforaphane नामक खास यौगिक भी होता है. यह पाचन तंत्र में आइसोथायोसाइनेट में बदल जाता है, जो कैंसर कोशिकाओं के विभाजन को बढ़ावा देने वाले जीन को निष्क्रिय करता है.
पहले भी हो चुके हैं रिसर्च

इससे पहले भी अमेरिका की ऑरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी (ओएसयू) और ऑरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने एक अध्ययन में सुझाव दिया था कि ब्रोकोली और क्रूसीफेरस सब्जियों से प्राप्त होने वाले sulforaphane (यौगिक) में लंबे समय तक कैंसर की रोकथाम वाले सबूत मिले हैं. इसलिए सल्फोराफेन कैंसर वृद्धि को कम करने में मददगार हो सकता है.
ओएसयू कॉलेज ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड ह्यूमन साइंसेज की प्रोफेसर एमिली हो ने बताया था कि अध्ययन के बाद महिलाओं की जांच में हम यह देखकर चकित हो गए थे कि इस यौगिक के द्वारा उन असाधारण चिन्हों में कमी आई थी. इसका तात्पर्य है कि यह यौगिक कैंसर वृद्धि को कम कर सकते हैं.
पहले हुए अध्ययनों में भी बताया गया है कि क्रूसीफेरस सब्जियां जैसे ब्रोकोली, गोभी या फूलगोभी का सेवन स्तन कैंसर के खतरे को कम करता है. इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को चाहिए वे अपने खान-पान में ब्रोकोली जरूर शामिल करें.
Source - Pakwan Gali

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